मार्च 2004 में कश्मीर के सोफियान जिल्हे में एक अंजान जगह पर बंद कमरे में एक लड़का जिसके बाल बड़े और घनी दाढ़ी हैं | बिल्कुल कश्मीरी अंदाज में यह लड़का हिजबूल मुजाहिद्दीन के दो सबसे खतरनाक आतंकवादियों के सामने बैठकर कहता हैं | मेरा नाम इफ़्तीखार भट्ट हैं, मेरे भाई को इंडियन आर्मी ने मार दिया | इसका बदला लेना हैं, यह सुनकर आतंकवादी उसकी बातों पर भरोसा कर लेते हैं |
इंडियन आर्मी पर हमला करने के लिए शस्त्रों को मंगाते हैं और कुछ आतंकवादीयों को भी भुलाते हैं | उसके बाद हमला कैसे करना इसके लिए वह दो आतंकवादी इफ़्तीखार के साथ मिलकर प्लान बनाते हैं |
लेकिन उनको आईडिया नहीं की वह कोई कश्मीरी नहीं
वह था इंडियन आर्मी का पारा स्पेशल फोर्स का अधिकारी - मेजर मोहित शर्मा सर |
लेकिन यह कहानी यही खत्म नहीं होती...
बचपन से फ़ौजी बनने का सपना
मेजर मोहित शर्मा सर का जन्म 13 जनवरी 1978 को रोहतक, हरियाणा में हुआ था | उनके पिताजी गाजियाबाद में पंजाब नेशनल बैंक में काम करते थे |
उनकी फॅमिली का दूर तक कोई कनेक्शन आर्मी के साथ नहीं था | लेकिन मोहित को बड़ा होकर से फ़ौजी बनना हैं | आर्मी की वर्दी पहननी हैं | यह जज्बा उनके अंदर बचपन से था |
मार्च 1995 में 12 के एग्जाम के बाद उन्होंने NDA का फॉर्म भरा | एडमिट कार्ड लेट ना हो, इसलिए दिल्ली जाकर खुद एडमिट कार्ड लेकर आये | रिजल्ट जुलाई या अगस्त में आने वाला था | उनके घरवालों पसंद नहीं था की मोहित आर्मी ज्वाइन करें |
भोपाल में SSB का इंटरव्यू पास किया उस दौरान उनको जॉन्डिस हुआ | जिसके चलते उनको टेम्पररी फेल कर दिया और एक महीने का समय दिया | मोहित ने कड़ी मेहनत से नामुनकिन को मुमकिन कर दिखाया |
उन्होंने NDA और फिर IMA की ट्रेनिंग पुरी की और दिसंबर 1999 को आर्मी में ज्वाइन किया |
ज़ब मोहित शर्मा बने स्पाई एजेंट
उनकी कहानी का सबसे रहस्यमय और खतरनाक मिशन उनका अंडरकवर ऑपरेशन
मार्च 2004 में एक खतरनाक मिशन के लिए उन्होंने खुद का रूप पूरी तरह बदल दिया | वह एक फ़ौजी से आम कश्मीरी बन गये और आतंकवादियों के ग्रुप में शामिल हो गये |
उन्होंने नाम बदलकर खुद का नाम इफ़्तीखार भट्ट रखा | उन्होंने अपना रूप पुरी तरह बदल दिया, लंबे बाल घनी दाढ़ी और कश्मीरी लहजा |
उनको इस मिशन के लिए सिर्फ रूप नहीं बदला बल्कि बोलने का अंदाज और भाषा दोनों बदले | कश्मीरी लोगों से बात कर उनका अंदाज सिख लिया |
यह मिशन इम्पॉसिबल लग रहा था, क्युकी एक फ़ौजी आतंकवादी बनकर उनके ग्रुप में शामिल होने वाला था | एक छोटी सी गलती और मरना तय |
इस मिशन के दौरान मोहित सर ने आतंकवादीयों के लिए खाना बनना उनके काम करना | लेकिन एक दिन वह कावा बनाकर उन दो आतंकवादियों के लिए लेकर आते हैं | उस वक्त उनको समझ आता हैं की इन दो आतंकवादियों उनपर शक होने लगा हैं |
उन्होंने उनसे कहा मै अपनी जान भी दे सकता हु | यह बात सुनकर जैसे ही आतंकवादी आपस में बात करने लगे तभी इफ़्तीखार बने मोहित ने घन निकालकर उनको वही पे खत्म कर दिया | उसके बाद वहाँ हीरो के अंदाज में बैठकर कावा पिने लग गये | असल में वह रियल हीरो थे | उन्होंने उस मिशन के दौरान कई इम्पोर्टेन्ट जानकारी हासिल की जो आगे चलकर काम आ गईं |
इस मिशन के बाद मेजर मोहित शर्मा सर को सर्वाच्च शौर्य पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया |
फिर आया शहादत का पल
कुप्वाड़ा का हाफरुदा जंगल |
घना जंगल और मुश्किल इलाका
और छिपे हुए आतंकवादी |
21 मार्च 2009 को सुरक्षा बलों ने इलाकों में सीक्रेट मिशन शुरू किया |
मेजर मोहित शर्मा अपनी टीम के साथ आगे बढ़ रहे थे |
अचानक आतंकवादीयों की तरफ से फायरिंग शुरू हो गईं | मुठभेड़ बेहद खतरनाक हो गईं
लेकिन मोहित शर्मा सर पीछे नहीं हटे उन्होंने ज़ब देखा उनके साथी घायल हो रहे हैं | उनको कवर फायर देकर पीछे जानें को बोला तब उनके साथी राजीव ने उनको आने को बोला | उन्होंने मना कर दिया और कहाँ मै आखिर में आऊंगा | उस वक्त उनके हाथ में एक गोली लग गईं | अपनी टीम का जोश कम ना हो इसलिए किसी को वह पता चलने नहीं देते | हाथ में कपड़ा बांधते हैं, जिससे खून ना निकले |
हवालदार राजीव जी को पता चलता हैं, वह फर्स्ट ऐड लेकर मोहित सर की तरफ आगे बढ़ते हैं | मोहित सर उनको मना कर देते हैं और आंतकवादीयों पर फायरिंग करने को बोलते हैं |
आतंकवादीयों की फायरिंग को रोकने के लिए मेजर मोहित शर्मा सर लांस नायक सुभाष जी को मल्टी ग्रेनेट चलाने का आदेश देते हैं | जैसे ही वह पोजीशन लेते हैं, उनको भी गोली लग जाती हैं |
ज़ब कोई ऑप्शन नहीं बचता हैं, तब मोहित शर्मा सर जिनके खुद के हाथ पर गोली लग चुकी हैं | उसके बावजूद वहाँ पहुंच कर मल्टी ग्रेनेट उठाकर आतंकवादियों पर चला देते हैं | दो आंतकवादी वही पर मर जाते हैं |
उसके बाद आतंकवादियों की फायरिंग स्लो हो जाती हैं | उस वक्त मोहित शर्मा सर एक स्पॉट आइडेंटिफाय करते हैं | उस पॉइंट पर पहुंचकर क्लोज रेंज में फायरिंग करेंगे तो आतंकवादियों को मारना आसान हो जाएगा | उसके लिए कवर छोड़ना पड़ता जो बहुत ज्यादा रिस्की था | अब यह करेगा कौन यह सोचने के बजाय मोहित शर्मा सर खुद आगे बढ़ गये | उन्होंने क्लोज रेंज में जाकर दो आतंकवादियों मार दिया |
ज़ब वह यह कर रहे थे तब उनके बुलेट प्रूफ जैकेट के साइड से उनकी चेस्ट में लग जाती हैं | उसके बाद भी एक पेड़ का सहारा लेकर आतंकवादियों पर फायरिंग करते रहते हैं | खून इतना निकल गया की मोहित सर की बॉडी वाइट होने लग गईं | उनकी हेल्प के लिए उनके साथी आगे बढ़ने लगते हैं | वह फिर भी मना कर देते हैं और आतंकवादियों पर फायरिंग करने को बोलते हैं |
उनकी सांसे फूलने लग गईं थी फिर भी वह फायरिंग करना नहीं छोड़ते | अपनी टीम का जोश कम नहीं होने दे रहे थे और रेडिओ पर सबकुछ सुनाई दे रहा था | वह सांस फूल भी रही थी फिर भी बोल रहे थे आतंकवादियों को छोड़ना मत यह सब बाते हेडकोटर को पता चल रही थी | वह अपने साथियो से कह रहे थे की इसी दिन के लिए हमने ट्रेनिंग ली हैं | धीरे धीरे उनकी आवाज बंद हो जाती हैं और फायरिंग भी स्लो हो जाती हैं |
वह आतंकवादियों के इतने क्लोज रेंज में थे की बाकि कमांडो चहाकर भी उनके पास पहुंच नहीं पा रहे थे | बड़ी मुश्किल से चार बजें हवालदार राजीव उनके पास पहुंचते हैं | तब पता चलता हैं की मोहित सर की सांस रुक गईं थी राइफल की सारी गोलियां खत्म हो गईं थी | रायफल की ग्रिफ एकदम टाईट थी, छूट नहीं रही थी | उनके पास उन्होंने मारकर आतंकवादी लेटा रखे थे |
हवालदार राजीव जी ने मोहित सर को कंधे पर उठाकर 1 किलोमीटर चलकर बेस पहुँचे वहाँ से हेलीकाप्टर के जरिए श्रीनगर ले जाया गया | वहाँ हॉस्पिटल में पहुंच कर सबको पता चल गया की हमारा रियल हीरो मेजर मोहित शर्मा सर देश के लिए शहीद हो गये |
शहीद मेजर मोहित शर्मा सर ने देश के लिए खुद की पहचान बदल दी अपने सारे निजी सुख दुख पीछे छोड़कर अपने साथियों को बचाकर देश के लिए सर्वाच्च बलिदान दिया |
मेजर मोहित शर्मा सर की शहादत की कहानी देशभक्ति का सर्वाच्च उदाहरण हैं | उनकी महानता को शब्दों में पुरी तरह बताना मुश्किल हैं |
रियल हीरो शहीद मोहित शर्मा सर को शत शत नमन 🇮🇳
जय हिन्द
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